प्रतियोगिता में खेलनेवाला प्रत्येक खिलाड़ी सब बातों में संयम रखता है। वे तो नाश होनेवाले मुकुट को प्राप्त करने के लिए ऐसा करते हैं, परंतु हम उस मुकुट के लिए करते हैं जो अविनाशी है। इसलिए मैं दौड़ता हूँ पर लक्ष्यहीन के समान नहीं, मैं मुक्केबाज़ी करता हूँ परंतु हवा में मारनेवाले के समान नहीं