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लूक़ा 6:38
उर्दू हमअस्र तरजुमा
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दोगे, तो तुम्हें भी दिया जायेगा। अच्छा पैमाना, दबा-दबा कर, हिला-हिला कर और लबरेज़ कर के तुम्हारे पल्ले में डाला जायेगा क्यूंके जिस पैमाने से तुम नापते, उसी से तुम्हारे लिये भी नापा जायेगा।”
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लूक़ा 6:45
अच्छा आदमी अपने दिल के अच्छे ख़ज़ाने से अच्छी चीज़ें निकालता है और बुरा आदमी बुरे ख़ज़ाने से बुरी चीज़ें बाहर लाता है क्यूंके जो दिल में भरा होता है वोही उस के मुंह पर आता है।
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लूक़ा 6:35
मगर तुम अपने दुश्मनों से महब्बत रखो, उन का भला करो, क़र्ज़ दो और उस के वसूल पाने की उम्मीद न रखो, तो तुम्हारा अज्र बड़ा होगा और तुम ख़ुदा तआला के बेटे ठहरोगे क्यूंके वह नाशुकरों और बदकारों पर भी मेहरबान है।
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लूक़ा 6:36
जैसा रहम दिल तुम्हारा बाप है, तुम भी वैसे ही रहम दिल बनो।
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लूक़ा 6:37
“ऐबजोई न करो, तो तुम्हारी भी ऐबजोई न होगी। मुजरिम न ठहराओ तो तुम भी मुजरिम न ठहराये जाओगे। मुआफ़ करोगे, तो तुम भी मुआफ़ी पाओगे।
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लूक़ा 6:27-28
“लेकिन मैं तुम सुनने वालों से कहता हूं: अपने दुश्मनों से महब्बत रखो, और जो तुम से नफ़रत रखते हैं उन का भला करो, जो तुम पर लानत करें उन के लिये बरकत चाहो, जो तुम्हारे साथ बुरा सुलूक करते हैं उन के लिये दुआ करो।
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लूक़ा 6:31
जैसा तुम चाहते हो के लोग तुम्हारे साथ करें तुम भी उन के साथ वैसा ही करो।
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लूक़ा 6:29-30
अगर कोई तेरे एक गाल पर थप्पड़ मारे, तो दूसरा भी उस की तरफ़ फेर दे। अगर कोई तेरा चोग़ा ले लेता है तो, उसे कुर्ता लेने से भी मत रोको। जो तुम से कुछ मांगे उसे ज़रूर दो, और अगर कोई तेरा माल ले लेता है तो उस से वापस मत मांग।
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लूक़ा 6:43
“क्यूंके जो दरख़्त अच्छा होता है वह बुरा फल नहीं लाता और न ही बुरा दरख़्त अच्छा फल लाता है।
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लूक़ा 6:44
हर दरख़्त अपने फल से पहचाना जाता है क्यूंके कांटों वाली झाड़ियों से न तो लोग अन्जीर तोड़ते हैं न झड़बेरी से अंगूर।
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