काहेकि जउन कुछू स्वरग माहीं हँय, अउर धरती माहीं हँय, उनहिन के सक्ती के द्वारा उत्पन्न भे हँय, सब कुछ जउन देखाई देत हें, अउर जउन देखाई नहिंव देंय, चाह सिंहासन होंय, चाह राज होंय, चाह कउनव सासन करँइ बाले होंय, अउर चाह कउनव अधिकारी होंय, सब कुछ उनहिन के द्वारा बनाए गे हँय, अउर उनहिन के खातिर बनाए गे हँय।