एसे हम चाहित हएन, कि हरेक मसीही मन्डलिन माहीं मंसेरुआ बिना गुस्सा, अउर झगड़ा किहे, खुद काहीं पबित्र रखिके अपने हाँथन काहीं ऊपर उठाइके परमातिमा से प्राथना करँय। इहइमेर सगली मेहेरिआ घलाय, सकुच के साथ खुद पर नियन्त्रन रखिके, उचित ओन्हन से खुद काहीं सजामँय, इआ नहीं कि बार गुहँय, अउर सोन-चाँदी, अउर मोतिन, अउर महग ओन्हन से, बलकिन निकहे-निकहे कामन से सजामँय, काहेकि जउन मेहेरिआ खुद काहीं परमातिमा के भक्ती करँइ बाली मनती हईं, उनखे खातिर इआ उचितव हय।