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भज़न 94:19
बाघली सराज़ी बोली दी पबित्र शास्त्र
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ज़ेभै मुंह खास्सअ हैल़अ फिकर हुअ, तेभै दैनअ तंऐं बिधाता मुल्है हैअ अर खुशी।
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भज़न 94:18
ज़ेतरी हुंह फिशल़ुअ थिअ, तेतरी हेरअ तंऐं बिधाता आप्पै हुंह थम्हीं, किल्हैकि तूह झ़ूरा मुल्है खास्सअ।
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भज़न 94:22
पर तूह बिधाता करा मेरी फाज़त, हुंह लआ ताह सेटा शरण।
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भज़न 94:12
हे बिधाता, तेऊ मणछे खुल़्हणै भाग ज़हा तूह नैरा अर आपणअ बधान सखाऊआ।
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भज़न 94:17
ज़ै तंऐं मेरी मज़त नांईं किई हंदी, तै गई ती आझ़ा लै कधू मेरी ज़िन्दगी खतम हई!
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भज़न 94:14
किल्हैकि तूह बिधाता निं आपणीं परज़ा कल्ही छ़ाडदअ, ज़ुंण तेरै आपणैं आसा, तिन्नां निं तूह आप्पू का दूर करदअ।
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