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भज़न 46:10
बाघली सराज़ी बोली दी पबित्र शास्त्र
OSJ
सह बोला इहअ, “झ़गल़ै करा बंद, एता लआ समझ़ी हेरे कि हुंह आसा परमेशर, देशा-देशे लोगा प्रैंदै आसा हुंह ई सैणअ अर सारै संसारा प्रैंदै आसा हुंह ई मालक।”
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भज़न 46:1-2
म्हारअ बल अर शरण लणें ज़ैगा आसा परमेशर, खरीए पलका करा सह ई म्हारी मज़त सदा। च़ाऐ धरती दी केही बी ज़ाज़री होए, बडै-बडै पर्बत ढूल़ी समुंदरै डुबे, तैबी बी निं हाम्हां किछ़ै डअर।
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भज़न 46:4-5
एक गाड आसा ज़ुंण म्हारै परमेशरे नगरी खुश दैआ करी, सह आसा परम प्रधान परमेशरो पबित्र बसेरअ। परमेशर आसा तैहा नगरी दी अर सह निं कधि बरैबाद हणीं, परमेशर जाआ राच भैणै का आजी तेसे मज़त करदअ एछी।
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भज़न 46:9
सह करा सारै संसारै जुध खतम, सह पाआ कबाण चोल़ी अर बर्छ़े करा सह ठोर-ठोर अर बडै-बडै रथा पाआ सह आगी जैंदरी दहई।
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