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भज़न 4:8
बाघली सराज़ी बोली दी पबित्र शास्त्र
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हुंह सका निहंचै राची निंजा सुत्ती किल्हैकि तूह बिधाता करा आप्पै मेरी फाज़त।
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भज़न 4:4
पर तम्हैं सोभै रहा डरदै-काम्बदै अर पाप करनअ छ़ाडा। एते बारै सोठा धोरै करै दिला का ज़ेभै तम्हैं कांगनरांगै आपणैं च़ैन्नै होए सुत्तै दै।
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भज़न 4:1
मुंह बच़ाऊंणै आल़ै परमेशर बिधाता, ज़ीबाण ज़ेभै हुंह अरज़ करूं तेभै दैऐ तूह तेतो ज़बाब, ज़ेभै मुंह गल़ै तैणीं घाटी ती आई दी, तेभै आअ तूह ई मुंह बच़ाऊंदअ। ऐबै कर तूह मुल्है झींण अर मेरी अरज़ शुण।
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