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भज़न 125:1
बाघली सराज़ी बोली दी पबित्र शास्त्र
OSJ
ज़ुंण बिधाता दी भरोस्सअ डाहा, तिंयां आसा सियोन पर्बता ज़िहै, ज़ुंण नां च़ुकदअ अर नां कधि ओर्ही-पोर्ही सिक्कदअ।
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भज़न 125:2
ज़ेही एरुशलेम नगरी फेर-फिरदी धारा आसा, तिहअ रहणअ बिधाता आपणीं परज़ा फेर आझ़ा पोर्ही सारी-सदा लै।
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