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भज़न 108:13
बाघली सराज़ी बोली दी पबित्र शास्त्र
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ज़ै तूह परमेशर हाम्हां संघै होए, तै जाणैं हाम्हैं ज़िती, ताह हेरनै म्हारै दुशमण हारी।
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भज़न 108:4
हाम्हां लै तेरी अटल़ झ़ूरी आसा सरगा का बी उझै तैणीं, तेरअ सत्त आसा सारै भ्रमंडै।
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भज़न 108:1
हे परमेशर, मेरअ दिल करा तेरअ पाक्कअ भरोस्सअ! मुंह करनी गिहा बोली तेरी ज़ै-ज़ैकार! मुंह बोल़णैं दिल खोल्ही तेरै भज़न।
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भज़न 108:12
हे बिधाता, म्हारै दुशमणा का बच़णा लै कर म्हारी मज़त, किल्हैकि मणछे मज़त हआ बृथा!
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