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भज़न 10:17-18
बाघली सराज़ी बोली दी पबित्र शास्त्र
OSJ
हे बिधाता, तंऐं हेरी भोल़ै लोगे अरज़ शूणीं। ताह दैणअ तिन्नां लै आप्पै हैअ। ताह करनअ छ़ुटै-मुक्कै अर रैनै-गरीबो नसाफ आप्पै, ताकि धरतीए मणछ आजू कधि बी होरी डरैऊंदै नांईं लागे।
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भज़न 10:14
पर तूह हेरा भाल़ी, ताखा जाआ खरी अर आफ़ता शुझुई, तूह हआ हर बगत मज़त करना लै तैर्हुई रहअ द। रैनै-गरीब लआ तेरी शरण अर छ़ुटै-मुक्कै दै लान्हैं निं तूह कल्ही छ़ाडदअ।
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भज़न 10:1
हे बिधाता, तूह किल्है हुअ हाम्हां का दूर? खरीए पलका किल्है लुक्कअ तूह?
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भज़न 10:12
हे परमेशर बिधाता, ऐबै दै तूह इना कदुष्ट मणछा लै सज़ा, रैनै-गरीबा बाखा निं पिठ डाहै फरेऊई।
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