“हुंह आसा बिधाता ज़हा का सारअ बल आसा, मंऐं लाई प्रोहता लै एक गल्ल बोली। लान्हैं करा आपणैं बाबो अदर अर दास करा आपणैं मालके इज़त। थारअ बाब अर मालक आसा हुंह, तै तम्हैं किल्है निं मेरअ अदर करदै? तम्हैं प्रोहतै किअ हुंह बेइज़त! पर तज़ी बी पुछ़ा तम्हैं, ‘हाम्हैं किहअ करै किअ तूह बेइज़त?’