“होरी कामां-काज़ा करना लै आसा तम्हां लै हबते छ़ह धैल़ै, पर हर हबतै मनै तम्हैं सातुई धैल़ी पबित्र किल्हैकि सह आसा मुल्है। च़ाऐ तम्हैं ज़िधी बी रहे तम्हैं करै सातुई धैल़ी बशैघ अर तैहा धैल़ी करै तम्हैं मुंह बिधाता लै पबित्र झाल़अ। अह बधान आसा तम्हां लै सदा लै।