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आयूब 31:1
बाघली सराज़ी बोली दी पबित्र शास्त्र
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“मंऐं आसा आपणीं आछी लै बी बधान डाहअ द कि मुंह निं कधि च़ंदरी सोठ डाही कहा शोहरी भाल़ै लागणअ।
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आयूब 31:4
परमेशरा का हआ सोभी गल्लो थोघ कि हुंह किज़ै करा। सह हआ मुंह गंईं-गंईं दी भाल़अ लागअ द।
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