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जेरमयाह 45:3-4
बाघली सराज़ी बोली दी पबित्र शास्त्र
OSJ
तूह बोला इहअ, “मुखा छ़ुटी छ़ाड़! बिधाता पाई मुल्है दुख अर आफ़त। हुंह थक्कअ दाह ज़िरी-ज़िरी, मुंह निस्सअ केही राम हई।” “‘पर ज़ुंण मंऐं बिधाता च़िणअ, सह लाअ मंऐं आप्पै ढोल़ी, अर ज़ुंण मंऐं रोही डाहअ सह लाअ मंऐं आप्पै गोधी का पेच़ी।
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