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जेरमयाह 39:17-18
बाघली सराज़ी बोली दी पबित्र शास्त्र
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पर मुंह बिधाता डाहणअ तूह बच़ाऊई अर तूह निं तिन्नें लोगे हाथै पल़णअ ज़हा का तूह डरा। तूह डाहणअ मुंह ज़िऊंदअ, ताह निं हुंह एऊ जुधा दी तलबारा करै मरनै दैंदअ। तेरी ज़िन्दगी जाणी बच़ी किल्हैकि तूह आसा मेरै आसरै रहअ द। अह गल्ल डाही मंऐं बिधाता बोली।’”
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