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पांच़ 16:20
बाघली सराज़ी बोली दी पबित्र शास्त्र
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संघा पाई ज़ोरै हाक्का, “शिमशोन! पलिश्ती आऐ!” सह उझ़ुअ निंजा का खल़अ अर तेऊ सोठअ इहअ, “मुंह उझ़णअ पैहलै ज़िहअ झ़ट च़ारै ज़िहअ सदा हआ त।” पर तेऊ का निं थोघै थिअ कि परमेशरो बल गअ तेऊ का दूर डेऊई।
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पांच़ 16:28
तेखअ किई शिमशोनै इहअ बोली बिधाता सेटा अरज़, “हे मेरै मालक महान बिधाता, मुंह निं बिस्सरी आथी, हे परमेशर ज़ीबाण, सिधअ एकी बारी दै मुल्है तूह भिई तिहअ ई ज़ोर ताकि हुंह पलिश्ती का आपणीं दुही आछिए कांणै हणैंओ एक बदल़अ लई सकूं।”
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पांच़ 16:17
खिरी पाअ तेऊ तैहा का शुचअ खोज़ी। शिमशोनै खोज़अ इहअ, “मेरै मुंडे ज़टा निं कधि आथी काटी दी, हुंह आसा हुऐ ज़ल्मां ओर्ही बिधाता लै अर्पण किअ द नज़ीर। ज़ै मेरी ज़टा काटे, तेखअ घटणअ मेरअ ज़ोर संघा हणअ हुंह आम मणछा ज़िहअ।”
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पांच़ 16:16
तैहा डाही तेऊ लै धैल़ एही ई कांग लाई। सह किअ तैहा एतरअ तंग अर तैहा किई एतरी हठ कि शिमशोन हिछ़ुअ अर
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पांच़ 16:30
तेखअ पाई ज़ोरै लैल़, “पलिश्ती संघै लोल़ी हुंह बी मूंअ!” तेऊ ढोल़ै आपणअ सारअ ज़ोर लाई तिंयां थाम्ह अर सह बडअ च़ऊंरअ ढूल़अ तिन्नां पांज़ राज़ै अर सोभी लोगा प्रैंदै। इहअ करै ज़ेतरै लोग शिमशोनै तिधी आप्पू मरदी बारी मारै, तिंयां थिऐ तेता का बी कई गुणा खास्सै ज़ुंण तेऊ आपणीं सारी अमरा मारै तै।
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