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ईशायाह 26:3
बाघली सराज़ी बोली दी पबित्र शास्त्र
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बिधाता दैआ तिन्नां लै शांती ज़ुंण तेऊ लै शुचै-पाक्कै रहा अर ज़ुंण सिधै बिधाते आसरै रहा।
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ईशायाह 26:4
सदा रहणअ बिधाते भरोस्सै, किल्हैकि सह आसा म्हारै सदा लै बडी टोल्हा ज़िहअ ज़ेथ पिछ़ू हाम्हैं शरण लई सका।
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ईशायाह 26:9
म्हारै दिलै हआ सारी राची तेरी ई सोठ पल़ी दी, ज़ेभै तूह पृथूई अर एथ बस्सै दै लोगो नसाफ करा, तेभै लागा सोभी का थोघ कि नसाफ किज़ै आसा।
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ईशायाह 26:12
ए बिधाता, ताह दैणीं हाम्हां लै बर्गत, ज़ेतरी गल्ला बी आझ़ तैणीं हाम्हैं पूरी किई, तेता लै किऐ हाम्हैं तंऐं ई सफल।
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ईशायाह 26:8
तूह आसा सह बिधाता ज़सरै आसरै हाम्हैं रहा कि ताह हेरनअ नसाफ करी, म्हारी सोभै गल्ला आसा तूह ई ज़ेता हाम्हैं च़ाहा।
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ईशायाह 26:7
हे बिधाता, तूह करा सदा भलअ, तूह करा तिन्नां लै सरली बात ज़ुंण तेरअ हुकम मना।
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ईशायाह 26:5
तेऊ बशैल़ै म्हारै शरेरै दुशमण धरनीं, तेऊ पाई तिन्नें उछ़टै गहल़ा आल़ी नगरी ढोल़ी ज़ेथ तिंयां बस्सै दै थिऐ, तिंयां राल़ी तेऊ धरनीं माट्टै जैंदरी।
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ईशायाह 26:2
नगरीए प्रऊल़ी घुआल़ा, ताकि धर्मीं देशे लोग भितरी डेओए, तिंयां मणछ आसा शुचै-पाक्कै।
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