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होशे 10:12
बाघली सराज़ी बोली दी पबित्र शास्त्र
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मंऐं बोलअ त इहअ, “कृषाणा ज़िहअ बऊआ राम्बल़अ बेज़अ धर्म अर नसाफ। तै झाल़णीं तम्हां सह फसल ज़ुंण शुची झ़ूरी आसा। थारै दिल आसा शणैहतै खेचा ज़िहै, तेथ लाआ हल़। अह आसा तम्हां लै बिधाता सेटा बापस फिरनेओ बगत कि सह एछे अर तम्हां लै आपणीं बर्गते बरसात करे।”
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होशे 10:13
पर तम्हैं लाअ हल़ संघा डाहै कदुष्ट काम बऊई अर तम्हैं झाल़ी तिन्नां ई पापे फसल। तम्हैं भुगतअ थारै धोखै दी रहणैंओ नतिज़अ। किल्हैकि तम्हैं तै आपणैं रथ-घोल़े आसरै रहै दै। तम्हैं सोठअ इहअ कि थारी बडी सैना अर तेता करै जाणैं तम्हैं बच़ी।
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