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मूल़ 4:7
बाघली सराज़ी बोली दी पबित्र शास्त्र
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ज़ै तंऐं राम्बल़अ किअ हंदअ, तै हणअ त तेरअ मुंह खिल्लअ द। तंऐं किअ कशूर अर पाप आसा ताह धेल़णा-च़िरना लै बराघा ज़िहअ ताखुअ द। पाप च़ाहा ताह बरैबाद करनअ, पर तूह करै तेऊ आपणैं काबू दी।”
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मूल़ 4:26
बादा का ज़ांऊं शेत ज़ुआन हुअ तेऊओ हुअ शोहरू तेऊ नाअं डाहअ तेऊ एनोश। तधा पोर्ही लागै लोग बिधाता का प्राथणां करदै।
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मूल़ 4:9
ज़ांऊं इहअ हुअ, बिधाता पुछ़अ कैना का, “तेरअ भाऊ आबल किधी आसा?” कैनै दैनअ ज़बाब, “मुखा निं थोघै, हुंह कै तेऊ पहरी आसा?”
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मूल़ 4:10
बिधाता बोलअ तेऊ लै, “तंऐं इहअ घोर पाप किल्है किअ? तंऐं पाअ आपणअ भाऊ मारी अर तेऊओ लोहू बगअ धरती दी। तेऊए लेरा-पकार पुजी मुंह सेटा कि ऐबै दैंऊं हुंह ताल्है तेते सज़ा।
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मूल़ 4:15
बिधाता बोलअ, “नां, ज़ै कुंण ताह मारे तेऊ लै दैणीं मुंह ताखा बी सात गुणा ज़ादी सज़ा।” तेखअ लाअ बिधाता कैना दी एक नछ़ैण कि तेता भाल़ी होर लोग तेऊ नांईं मारे।
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