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लुआह 22:22-23
बाघली सराज़ी बोली दी पबित्र शास्त्र
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“नां कहा बिधबा अर छ़ुटै-मुक्कै दै लान्हैं लै दुख दैई। ज़ै तम्हैं इना इहै लै दुख दैए, अर तिंयां मुखा अरज़ करी मज़त मांगे, हुंह शूणां इना इहै मणछे लेर-पकार छ़ेक्कै
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लुआह 22:21
“तम्हां जैंदरी ज़ुंण परदेसी मणछ रहा, तेऊ निं तम्हैं तंग करी, नां तेऊ लै दुख दैई, तम्हैं डाहणीं अह गल्ल कबल्ली आद कि तम्हैं बी थिऐ मिसर देशै परदेसी।
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लुआह 22:18
“तैहा बेटल़ी लै आसा मौते सज़ा ज़ुंण ज़ादू-मत्र करा।
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लुआह 22:25
“तम्हां मांझ़ै मेरअ कुंण गरीब मणछ होए, ज़ै तम्हैं तेऊ लै ढब्बै ऋण दैए, तेऊ का निं लागी बडै साहुकार बणी बैज़ा मांगदै।
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