“तैही मनै तम्हैं बिधाते सोभी हुकमा ज़ुंण मंऐं आझ़ लाऐ तम्हां का खोज़ी। तम्हैं झ़ूरै आपणैं परमेशर बिधाता लै अर दिला का करै तेऊए च़ाकरी। ज़ै तम्हैं तेऊओ हुकम मने, तै हणअ थारै देशै हिंऊंद-भराल़ आपणीं ऋता राम्बल़अ अर तेता करै हणीं थारी साल-फसल अर तेखअ हणअ थारै आपणअ नाज़, दाखो रस, जैतूनो तेल अर डागै-चैणैं लै घाह-पाच बतेर्हअ।