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2 राज़ै 7:1
बाघली सराज़ी बोली दी पबित्र शास्त्र
OSJ
एलिशा दैनअ राज़ै लै ज़बाब, “ऐबै शुण कि बिधाता किज़ै बोला! बिधाता बोला इहअ, ‘काल्ला ऐहा ई बेला पोर्ही सका तूह सामरी नगरी दूई पाथै कणको पिठअ एक च़ंदीए ढब्बअ अर आधअ मण पाक्कअ ज़ौ पिठअ एक च़ंदीओ ढब्बअ दैई मोलै लई।’”
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2 राज़ै 7:3
सामरी नगरीए प्रऊल़ी बागै थिऐ च़ार मणछ बेठै दै ज़हा कोहल़ ती निखल़ी दी, तिंयां लागै आप्पू मांझ़ै एही गल्ला करदै, “हाम्हैं किल्है आसा इधी बेशी मौता न्हैल़ै लागै दै?
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2 राज़ै 7:2
राज़े एकी खास दरबारी बोलअ एलिशा लै, “इहअ निं हई ई सकदअ, ज़ै बिधाता आप्पै बी सरगा का नाज़ तरैल़ी दैए, तैबी बी निं इहअ हई सकदअ!” एलिशा दैनअ ज़बाब, “ताखा जाणअ काल्ला आपणीं आछी शुझुई, पर ताह निं तेऊ नाज़ा का खाणां लै भेटणअ।”
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