दुजै धैल़ै दोत्ती भाल़अ अशदोद नगरीए पज़ैरै कि तिन्नें दगोन देअए सह मुहुर्ती आसा बिधाते करारे मणशू सेटा धरनीं उटी बाखा पल़ी दी। तिन्नैं डाही तेखअ सह मुहुर्ती तिधी भिई तेही ई खल़ी करी। पर चिऐ धैल़ै दोत्ती बी ज़ांऊं तिंयां उझ़ुऐ, तिन्नैं भाल़ी भिई सह मुहुर्ती तेही ई बिधाते करारे मणशू सेटा उटी बाखा पल़ी दी। ऐहा बारी थिई दगोन देअए मुहुर्तीए दुहै बाहा अर मूंड चुटी करै डेहल़ा सेटा पल़ै दै अर पिछ़ू ती सिधी घेर बच़ी दी।