अर तीसरे सुर्गदूत नै तुरही फूक्की, अर एक बड्ड़ा तारा जो मशाल की ढाळ जळै था, सुर्ग तै टूट्या, अर नदियाँ कै तीसरे हिस्से पै, अर पाणी के चोवां पै आण पड्या। उस तारे का नाम नागदौना सै, अर एक तिहाई हिस्से का पाणी नागदौना बरगा कड़वा होग्या, अर घणखरे माणस उस पाणी कै कड़वे हो जाण तै मरगे।