बलात्कारियाँ नै भी परमेसवर अपणी शक्ति तै खींच लेवै सै,
जो जिन्दा रहण की आस न्ही राखदा, वो भी फेर उठ बैठ्ठै सै।
उननै इसा बेधड़क कर दे सै, के वे सम्भळे रहवै सै;
अर उसकी कृपादृष्टि उनकी चाल पै लाग्गी रहवै सै।
वे बढै़ सै, फेर थोड़ी देर म्ह जान्दे रहवै सै,
वे दबाए ज्या अर सारया की तरियां छोड़ दिए जावै सै,
अर नाज की बाळ की तरियां काट्टे जावै सै।