इसनै चाहे वे सुणै या ना सुणै; फेर भी तू मेरे वचन उनतै कहिये, वे तो बड़े बिद्रोही सैं।”
“पर हे माणस की सन्तान, जो मै तेरै तै कहूँ सूं, उसनै तू सुण ले, उस बिद्रोही घरान्ने की तरियां तू भी बिद्रोही न्ही बणना जो मै तन्नै देऊँ सूं, उसनै मुँह खोलकै खा ले।”