एक दिन साँझ के बखत दाऊद पलंग पै तै उठकै राजभवन की छात पै घूम्मै था, अर छात पै तै उसनै एक जनान्नी, जो घणी सुथरी थी, नहान्दी होई दिखाई देई। जिब दाऊद नै भेजकै उस जनान्नी ताहीं पूच्छवाया, फेर किसे नै कह्या, “के या एलीआम की बेट्टी, अर हित्ती ऊरिय्याह की घरआळी बतशेबा न्ही सै?”