क्यूँके जै मै घमण्ड करणा चाहूँ भी तो बेकूफ न्ही बणुगाँ, क्यूँके सच बोल्लूँगा; मै अपणी बड़ाई न्ही करणा चाहन्दा, इसा ना होवै के जिसा कोए मन्नै देक्खै सै या मन्नै सुणै सै, मन्नै उसतै बाध समझै।
मेरे ताहीं परमेसवर नै जो अदभुत बात दिखाई सै, उन ताहीं देखकै मै घमण्ड म्ह ना जाऊँ, इस करकै मेरी देह म्ह काण्डा चुभाया, यानिके शैतान का एक दूत मेरै घुस्से मारे ताके मै फूल न्ही जाऊँ।