भईया हरौ, मैं अबै लौ जो सब नईं पाओ हों, परन्त एक काम करत आंव, कि जो बातें पाछें छूट गईं, उन हां बिसर के आगे की बातन हां पाबें हां बढ़ो जात आंव। मैं आगे हां निसाने पै पहुंचबे हां बढ़ो चलो जात आंव, कि ऊ इनाम पाओं, जीके काजें पिरभू ने मोहां बुलाओ आय कि मोहां सरग पौचाबे।