शेष मनुष्यों ने, जो इन महामारियों से नाश नहीं हुए थे, अपने हाथों के कामों से मन न फिराया; उन्होंने अशुद्ध आत्माओं तथा सोने, चांदी, कांसे, पत्थर और लकड़ी की मूर्तियों की, जो न तो देख सकती हैं, न सुन सकती हैं और न ही चल सकती हैं, पूजा करना न छोड़ा और न ही उन्होंने हत्या, जादू-टोना, लैंगिक व्यभिचार तथा चोरी करने से मन न फिराया.