जब उन्होंने तीसरी मोहर तोड़ी तो मैंने तीसरे प्राणी को यह कहते हुए सुना: “यहां आइए!” तब मुझे वहां एक घोड़ा दिखाई दिया, जो काले रंग का था. उनके हाथ में, जो उस पर बैठे हुए थे, एक तराजू था. तब मैंने मानो उन चारों प्राणियों के बीच से यह शब्द सुना, “एक दिन की मज़दूरी एक दीनार का एक किलो गेहूं, एक दिन की मज़दूरी का तीन किलो जौ, किंतु तेल और दाखरस की हानि न होने देना.”