या किस वस्तु से मनुष्य अपने प्राण का अदला-बदली कर सकते हैं? जो कोई इस अविश्वासी तथा पापमय युग में मुझे तथा मेरे वचन को लज्जा का विषय समझते हैं, मानव-पुत्र भी, जब वह अपने पिता की महिमा में पवित्र स्वर्गदूतों के साथ आएंगे, तब उन्हें स्वीकार करने में लज्जा का अनुभव करेंगे.”