कोई भी व्यक्ति जलते हुए दीप को किसी बर्तन से ढांक कर नहीं रखते; उसे उसके निर्धारित स्थान पर रखा जाता है कि वह उस घर में उपस्थित लोगों को प्रकाश दे. लोगों के सामने अपना प्रकाश इस रीति से प्रकाशित होने दीजिए कि वे आप लोगों के भले कामों को देख सकें तथा आपके पिता की, जो स्वर्ग में हैं, महिमा करें.