“यदि आप अपने हृदय को शुद्ध दिशा की ओर बढ़ाएं,
तथा अपना हाथ परमेश्वर की ओर बढ़ाएं,
यदि आपके हाथ जिस पाप में फंसे हैं,
आप इसका परित्याग कर दें तथा अपने घरों में बुराई का प्रवेश न होने दें,
तो आप निःसंकोच अपना सिर ऊंचा कर सकेंगे
तथा आप निर्भय हो स्थिर खड़े रह सकेंगे.