इन सारी घटनाओं के बाद मोरदकय ने इन सारी घटनाओं को लिखकर राजा अहषवेरोष के सारे साम्राज्य के यहूदियों को पत्रों में प्रेषित किया, निकट तथा दूर सभी को. इसमें उन्होंने यह आदेश दिया था, कि अदार महीने की चौदहवीं एवं पंद्रहवीं तिथियों पर प्रति वर्ष उत्सव मनाया जाए. यह इस बात का स्मारक था, कि इन दो दिनों में यहूदियों ने अपने शत्रुओं पर विजय पायी थी, यह वह महीना था, जिसमें उनका विलाप आनंद में तथा दुःख उत्सव में बदल गया था. मोरदकय ने उन्हें लिखा कि वे उत्सव के इन दो दिनों में उल्लास के साथ आपस में भोजन व्यंजनों का आदान-प्रदान करें तथा गरीबों को उपहार दिया करें.