तैयो बाँकी बाँचल लोक, जे सभ एहि विपत्ति सभ सँ मारल नहि गेल छल, से सभ अपना हाथक रचल वस्तु सँ एखनो मोन नहि हटौलक। ओ सभ दुष्टात्मा सभक, आ नहि देखऽ वला, नहि सुनऽ वला, नहि चलऽ वला, सोना, चानी, पित्तरि, पाथर आ काठक मूर्ति सभक पूजा कयनाइ नहि छोड़लक। ओ सभ हृदय-परिवर्तन नहि कयलक, बल्कि हत्या, जादू-टोना, अनैतिक शारीरिक सम्बन्ध आ चोरी वला अपन काज सभ करिते रहल।