जँ हम अपन बड़ाइ करहो चाहितहुँ तँ तैयो हम मूर्ख नहि होइतहुँ, किएक तँ हम सत्ये बजितहुँ। मुदा हम से नहि करब जाहि सँ प्रत्येक व्यक्ति हमरा जे करैत देखैत अछि वा कहैत सुनैत अछि, ताहि अनुसारेँ मात्र हमर मूल्यांकन करय, नहि कि ताहि सँ बढ़ि कऽ। हमरा पर प्रगट कयल एहि बहुत अद्भुत रहस्य सभक कारणेँ हम घमण्ड नहि करऽ लागी, ताहि लेल हमरा शरीर मे एकटा काँट गरा देल गेल। अर्थात्, शैतानक एक “दूत” हमरा कष्ट देबाक लेल राखि देल गेल जाहि सँ हम घमण्डी नहि भऽ जाइ।