एहि वर्तमान संसारक चीज-वस्तुक दृष्टिकोण सँ जे सभ धनिक अछि, तकरा सभ केँ आज्ञा दिऔक जे ओ सभ अहंकारी नहि बनय। ओ सभ धन-सम्पत्ति पर नहि, जे जल्दी सँ समाप्त होइत अछि, बल्कि परमेश्वर पर भरोसा राखय, जे अपना सभ केँ आनन्दित रहबाक लेल सभ वस्तु पर्याप्त मात्रा मे दैत छथि।