मती 27:51-52

मती 27:51-52 RWR

उणी वेळा मिंदर रौ परदो ऊपर ऊं नीचे तांई फाटनै दो टुकड़ा हो गिया, धरती कांप उठी, चटानों फाट गी, कबरौ खुलगी अर घणा पवितर लोगां रौ सरीर पाछौ जी उठयौ।

Bezpłatne plany czytania i rozważania na temat: मती 27:51-52