मिका 3

3
बिधाता दैणीं कदुष्ट इज़राईली सैणैं लै सज़ा
1तेखअ बोलअ मंऐं, “तम्हैं इज़राईली सैणैं शूणां! तम्हैं याकबे आद-लुआद ज़ुंण इज़राईली परज़ा प्रैंदै राज़ करनै आल़ै शूणां मेरअ समाद! तम्हां का आसा राम्बल़अ थोघ कि शुचअ नसाफ किहअ लागा करनअ! 2पर तम्हां आसा भलै करना लै नफरत। तम्हैं झ़ूरा बूरअ ई करना लै! तम्हैं हंता मेरै साथी भाई यहूदी इहै ज़िहअ कुंण ज़िऊंदै मणछे खाल काढा अर तेखअ करा सह मास्स थोस्सी हाडकै का ज़ुदै! 3तम्हैं खाआ मेरै लोगो मास्स, तम्हैं धेल़ा तिन्‍नें देही का खाल संघा छ़िन्हां तिन्‍नें हाडकै! तिन्‍नें हाडकै अर मास्स पाआ तम्हैं बडै हांडै भितरी शिखा ज़िहै। 4एक बगत एछणअ तम्हां कदुष्ट सैणैं लै इहअ कि तम्हैं हणैं बिधाता सेटा लेर-पकार पाई मज़त मांगदै लागै दै, पर तेऊ निं थारी मज़त करनी। ज़ेभै अह बगत एछे तेभै डाहणीं बिधाता थारै कदुष्ट कामां पिछ़ू तम्हां बाखा पिठ फरेऊई।
5“ठगणै आल़ै गूरा लै बोला बिधाता इहअ, ‘तिन्‍नां गूरा लै आसा लानत ज़ुंण झ़ुठअ समाद खोज़ा। झ़ुठी ज़बान दैई ठगा तिंयां मेरी परज़ा। तिन्‍नां भेटा लोगा का खाणां लै रोटी अर तेता करै हआ तिंयां खुश। तैही डाहा तिंयां इहअ झ़ुठअ हैअ दैई कि आजू निं जुध हणअ आथी! ज़ै लोग तिन्‍नां लै रोटी दैणैं का हुधूऐ, तै एछा तिन्‍नां रोश्शै, संघा खोज़ा इहअ कि आजू हणअ जुध! 6गूरो! थारै धैल़ै गऐ ऐबै मुक्‍की! ऐबै च़ाल्‍लअ तम्हां लै धैल़अ उडी। किल्हैकि तम्हैं डाही मेरी परज़ा कबाता पाई, ऐबै निं तम्हां धैन हणैं अर तम्हैं निं आजू किछ़ खोज़णैं जोगी रहणैं। 7तेखअ हणैं तम्हैं मणशाण झ़ैऊंणै आल़ै शर्मिंदै, तम्हां आजू हणैं आल़ी गल्‍ला खोज़णैं आल़ै लै पल़णअ झाख। तम्हां लागणअ शर्मिंदै हई आपणअ मुंह च़ोरनअ किल्हैकि तम्हां निं मुंह बिधाता बाखा किछ़ै समाद भेटणअ।’
8“रही मेरी गल्‍ल, मुल्है आसा बिधाते आत्मां खास्सअ बल दैनअ द। सह खोज़ा मुखा कि भलअ अर नसाफ किज़ै आसा। सह ई दैआ मुल्है तम्हां याकबे आद-लुआदा संघै गल्‍ला करने हिम्मत। हुंह सका तम्हां का खोज़ी कि तम्हैं किज़ै पाप किअ। तम्हैं आसा इज़राईली पर तम्हैं निं ज़िहअ बिधाता बोलअ तिहअ किअ आथी। 9तम्हैं याकबे आद-लुआदा प्रैंदै सैणैं शूणां! तम्हैं आसा इज़राईला प्रैंदै राज़ करनै आल़ै। पर तम्हैं निं भलअ अर नसाफ किअ ई आथी। तम्हैं डाहा राम्बल़ी गल्‍ला बाख खोई। 10तम्हैं आसा एरुशलेम परमेशरे नगरी बणांदै लागै दै, पर तम्हैं आसा नर्दैई अर तम्हैं पाआ धर्मीं मणछा मारी। 11तम्हैं आसा नगरी दी राज़ करनै आल़ै पर तम्हैं खाआ रेशपत अर तेखअ निं तम्हैं लोगो शुचअ नसाफ करदै! तम्हैं प्रोहत दैआ लोगा लै शिक्षा ज़ै तम्हां लै तिंयां ढब्बै दैए। तम्हैं गूर खोज़ा आजू हणैं आल़ी गल्‍ला सिधै ढब्बै झाल़णैं तैणीं! तज़ी बी बोला तम्हैं इहअ कि तम्हैं आसा मालके आसरै! तम्हैं बोला इहअ पै, ‘बिधाता आसा हाम्हां संघै अर हाम्हां लै निं किछ़ै बूरअ हणअ!’
12“ज़ेऊ साबै तम्हैं ज़िन्दगी ज़िऊआ, तेऊ साबै हणीं एरुशलेम नगरी बाहै दै खेचा ज़ेही, एथ रहणीं सिधी पात्थरे डिंगरी अर बिधाते भबने धारठी हणीं घणैं बणां ज़ेही।”

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