गणांई 35

35
नगरी ज़ुंण लेबी गोत्रे हेस्सै आई
1इज़राईली थिऐ अज़ी बी मोआब जरदण नदीए बाढै आर बाखा जेरिहो नगरी नेल़ रेगीस्तानै डेरै पाऐ दै। बिधाता बोलअ तिधी मोसा लै इहअ,#ज़ैह. 21:1-42 2“तूह डाह इज़राईली का इहअ खोज़ी कि ज़ेभै थारै सोभी गोत्रा आपणैं-हेस्से ज़ैगा भेटी जाए, तेता मांझ़ै छ़ाडै थोल़ी नगरी अर तेता ओरी-पोरी डागै-चैणैं लै घैहणीं लेबी गोत्रा लै ज़रूर। 3ताकि तिन्‍नां नगरी दी लेबी गोत्रे लोग बस्से अर तेता ओरी-पोरी घैहणीं तिन्‍नें डागै-चैणैं अर तिन्‍नें होरी ज़ीबा च़रना लै होए। 4तिन्‍नां नगरी फेर ज़ुंण घैहणीं तम्हां लेबी लै दैणीं, तिंयां लोल़ी नगरी फेरे गहल़ा पोर्ही च़ऊ बाखा एक-एक हज़ार हाथ आजू तैणीं हुई।
5“तिन्‍नां नापै एऊ साबै कि दखण-पुर्बा, उतर-पछ़म, दखण-पछ़म अर उतर-पुर्बा दिशा नापी लोल़ी दूई-दूई हज़ार हाथ लाम्मी हुई अर नगरी लोल़ी मांझ़ा-मांझ़ी हुई। लेबीए हर नगरी दी लोल़ी एतरी ज़ैगा डागै-चैणैं च़ारना लै घैहणीं रही।
6“छ़ह नगरी दैऐ तम्हैं लेबी लै एही कि तिंयां हणीं शरण नगरी। ज़ै कुंण मणछ गलती दी कसरी हत्या करे, सह हत्या करनै आल़अ मणछ सका तिन्‍नां नगरी लै ठुर्ही आपणीं ज़ान बच़ाऊई। एता का लाऊआ दैऐ तिन्‍नां लै बयाल़ी होर नगरी। 7इहअ करै एछणी लेबी गोत्रे बांडै पठी अड़ताल़ी नगरी अर तिन्‍नां सोभी नगरी फेर घैहणीं।
8“ज़ुंण नगरी तम्हां लेबी लै दैणीं, तिन्‍नां दैऐ इज़राईले होर सोभी गोत्रे लोग आपणैं-आपणैं हेस्सै दी आई दी नगरी मांझ़ा का लेबीए नाओंऐं करी। ज़हा गोत्रा का खास्सी आसा तिंयां दैऐ खास्सी अर थोल़ी आल़ै दैऐ थोल़ी।”
हत्या करनै आल़ै लै आपणीं ज़ान बच़ाऊंणे ज़ैगा
(बधान 19:1-13)
9बिधाता बोलअ मोसा लै इहअ,#बधा. 19:2-4; ज़ैह. 20:1-9 10“इना इज़राईली का डाह इहअ खोज़ी कि ज़ेभै तम्हैं जरदण नदी पार टपी कनान देशै बस्सी जाए, 11तिधी डाहै एही नगरी ज़ुंण तम्हां लै शरण नगरी होए। तिंयां हणीं एता लै, ज़ै कुंण मणछ गलती दी कसरी हत्या करे, सह हत्या करनै आल़अ मणछ सका तिन्‍नां नगरी लै ठुर्ही आपणीं ज़ान बच़ाऊई। 12ज़हा मणछे हत्या हुई, तेऊए रिश्तैदार ज़ुंण तेतो बदल़अ लणअ च़ाहा, तिन्‍नां का सका सह मणछ इना नगरी लै ठुर्ही आपणीं ज़ान बच़ाऊई। तेखअ निं तेऊ तेभै तैणीं मारी सकदै ज़ेभै तैणीं टोलीए सोभी लोगा सम्हनै तेऊए मकदमैंओ फैंसलअ निं हई जाए।
13“ईंयां शरण नगरी लोल़ी छ़ह हुई। 14तिंयां नगरी लोल़ी कनान देशै जरदण नदी आर-पार दोहरै मुल्खै हुई। 15ईंयां शरण नगरी हणीं इज़राईली मांझ़ै रहणैं आल़ै परदेसी अर तिन्‍नां लै ज़हा मणछे भलै गलती दी कसरी हत्या होए हुई दी।
16-18“पर ज़ै कहा मणछे हाथै लोहेओ इहअ चाण, पात्थर या बींड होए ज़ेता बाही कुंण मरी सका, तेता करै ज़ै सह कहा होरी लै एही बाहे कि सह मणछ मरे, सह हणीं ज़ाणीं भुझ़ी करै किई दी हत्या अर तिहै हत्या करनै आल़ै मणछा पाऐ 19तेऊओ कुंण रिश्तैदार मारी ज़सरी हत्या हुई। तेऊ हत्या करनै आल़ै सका तिंयां ज़िधी भेटअ तिधी कज़ेभल़ी मारी।
20-21“ज़ै कुंण मणछ कहा होरी संघै ज़ीद डाही रोश्शै तेऊ धाक्‍कअ दैई, नभैऊशै बाही या तेऊ प्रैंदै किज़ै शोटी मारी पाए, सह हणीं ज़ाणीं भुझ़ी करै किई दी हत्या अर तिहै हत्या करनै आल़ै मणछा बी पाऐ तेऊओ कुंण रिश्तैदार मारी ज़सरी हत्या हुई। तेऊ हत्या करनै आल़ै सका तिंयां ज़िधी भेटअ तिधी कज़ेभल़ी मारी।
22-24“पर ज़ै कहा किछ़ै ज़ीद-मिश नांईं होए अर कुंण होर तेऊए भलै गलती दी धाक्‍कअ बुल़्ही, नभैऊशै लागी या तेऊ प्रैंदै किज़ै पल़ी मरे, ज़ै तेऊ सह ज़ाणीं भुझ़ी करै नांईं मारअ होए, एता लै करै इज़राईली टोली तेऊ दोशी मणछा अर तेऊ मूंऐं दै मणछे रिश्तैदारा मांझ़ै बधाने साबै फैंसलअ कि तेथ तेऊओ कशूर आसा कि नांईं।#गण. 35:12; ज़ैह. 20:6 25ज़ै टोली का शुझिए कि तेथ निं तेऊओ किछ़ै कशूर आथी, तेऊ मणछा डाहै टोलीए लोग कहा एकी शरण नगरी तेऊ मारै दै मणछे रिश्तैदारा का बच़ाऊई। ज़ेभै तैणीं तेऊए माथै तेल मल़ी अभिषेक करनै आल़अ माहा प्रोहत ज़ांऐं निं होए तेभै तैणीं रहै सह मणछ तिधी। 26पर ज़ै सह मणछ तेऊ माहा प्रोहते ज़ांऐं हणैं का आजी केभै बी शरण नगरी का किधी बागै डेओए 27अर तेथ तेऊ मारै दै मणछे रिश्तैदार तेऊ मारी पाए, तेखअ निं तिन्‍नां तेतो किछ़ै दोश लागणअ ज़ुंणी तेऊ मारी आपणैं रिश्तैदारे हत्या हणैंओ बदल़अ लअ। 28किल्हैकि तेऊ मणछा लागा त माहा प्रोहता ज़ांऐं हणैं तैणीं शरण नगरी रहणअ, तेखअ सका त सह आपणैं घअरा लै डेऊई।
29“तम्हैं इज़राईली मनै एऊ बधाना पोस्ती दर पोस्ती इहै ई।
30“ज़ुंण कहा मणछे हत्या करे तेऊ लै दैऐ मौते सज़ा। पर कहा एकी मणछे शाजती पिछ़ू निं कहा मारी, किछ़ नां किछ़ दूई शाजत ता लोल़ी तेता लै हुऐ।#बधा. 17:6; 19:15; मोत्त. 18:16 31ज़हा मणछा लै मौते सज़ा भेटे, तेते बदल़ै निं तेऊ का सांठ ढाकी, तेऊ पाऐ मारी ई। 32ज़ै कुंण हत्या का नर्दोश शरण नगरी होए डाहअ द, सह बी निं सांठ भरी आपणैं घअरा लै तेभै तैणीं डेऊई सकदअ, ज़ेभै तैणीं सह तेऊए माथै तेल मल़ी अभिषेक करनै आल़अ माहा प्रोहत ज़ांऐं निं होए।
33-34“हुंह बिधाता रहा तम्हां इज़राईली जैंदरी, थारी ज़ैगा लोल़ी सदा शुची रही। ज़ेभै कसरी हत्या हआ तेते लोहू करै लागा तैहा धरती दी छ़ोत। ज़ै केभै इहअ होए, तै करै तेऊ हत्या करनै आल़ै मणछा मारी करै तेतो प्राश्त अर तेऊए लोहू करै हणीं तेखअ सह ज़ैगा शुची। पर तम्हैं इज़राईली निं कधि हत्या करी!”#लेब. 18:24; बधा. 21:7

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