जेरमयाह 49

49
अमोन नगरीए बारै बिधातो समाद
1 # एज. 21:28-32; 25:1-7; आम. 1:13-15; सप. 2:8-11 अमोनी लोगे बारै बोलअ बिधाता इहअ,
“इज़राईली मर्ध किधी आसा?
तिन्‍नां मांझ़ै कोह निं निखल़अ ज़ुंण आपणीं जदी ज़ैगा बस्सी सके?
तै किल्है हुऐ मोलक देअए पूज़ा करनै आल़ै गाद मुल्खे मालक?
तिंयां किल्है बस्सै गाद सोभी इज़राईली नगरी दी?
2आजू एछणैं इहै धैल़ै, मुंह शणाऊंणी
राज़धानी रबाह बस्सै दै अमोनी लोगा का जुधे हाक्‍का,
अह नगरी करनी ढोल़ी करै पठी उज़र कि एथ रहणीं सिधी पात्थरे डिंगरी,
एता फेर फिरदै गराअं करनै आग चैल़ी खतम।
इज़राईली छ़ड़ैऊंणी अह ज़ैगा तिन्‍नां का बापस
ज़ुंणी एथ कबज़अ आसा किअ द।
3हेशबोन नगरीए लोगो! लेरा लाआ! एई नगरी हुई बरैबाद!
रबाह नगरीए बेटल़ीओ ज़ोरै-ज़ोरै लाआ लेरा!
घेरी बान्हां खिंथल़ै संघा करा शोग।
नगरीए दुआली भितरी दैआ लेरा लांदी कज़ेस्सी ठुर्हा।
थारअ मोलक देअ करनअ तेऊए प्रोहत अर कार-करिंदै संघी कैद।
4तम्हां आसा थारै रज़दै-पज़दै खागो घमंड,
पर तिंयां हणैं हेरा-हेरी बरैबाद।
अमोनीओ, तम्हैं आसा विश्वास घाती अर
तम्हां आसा घमंड कि तम्हैं आसा सेठ! तम्हैं आसा इहै निहंचै रहै दै कि
तम्हां संघै निं कधि कोही जुध लाअ छ़ेल़ी!
5मुंह पाणीं तम्हां लै फेरा-फेर डअर।
तम्हां लागणीं ठुर्हा, तम्हैं ठुर्हनै सोभ आपणीं-आपणीं ज़ान बच़ाऊंदै दूर।
तेखअ निं इहअ रहणअ ई आथी कि कुंण तम्हां सोभी झाल़ी कठा करे।
हुंह आसा स्वर्गे सारी सैनो मालक बिधाता,
6पर बादा का करनै मुंह अमोनी भिई भरै-पूरै ज़िहै पैहलै थिऐ।
अह गल्‍ल डाही मंऐं बिधाता बोली।”
एदोम देशा लै बिधातो नसाफ
7 # ईशा. 34:5-17; 63:1-6; एज. 25:12-14; 35:1-15; आम. 1:11,12; ओब. 1:1-14; मिक. 1:2-5 बिधाता ज़ुंण स्वर्गे सारी सैनो मालक आसा, सह बोला एदोम देशे बारै इहअ,
“तेमान नगरी दी ऐबै अक्ल ई निं रही?
तिन्‍नें सलाहकार तिन्‍नां का खोज़दै निं आथी कि किज़ै लागा करनअ?
तिन्‍नें अक्ल कै पठी हुई खतम?
8ददान नगरीए लोगो! पिछ़ू ठुर्हा संघा लुक्‍का!
मंऐं लाई एसाबे आद-लुआदा लै सज़ा दैई,
किल्हैकि मेरअ तिन्‍नां लै सज़ा दैणैंओ बगत गअ पुजी।
9ज़ेभै लोग दाख चोल़ा, तेथ छ़ुटा बेला दी पाचा मांझ़ै तिन्‍नां का धख एही,
ज़ै राची च़ोर आऐ, तिंयां च़ोरा ज़ेतरअ तिन्‍नों दिल बोला तेतरअ।
10पर मंऐं चोल़ै एसाबे आद-लुआदा मांझ़ै पठी,
तिन्‍नें तिंयां ज़ैगा घुआल़ी मंऐं पठ ज़ेथ तिंयां लुक्‍कै दै आसा,
तिन्‍नैं लान्हैं, तिन्‍नैं भाई-बंध,
ताकि आजू तिंयां लुक्‍की निं सके।
एदोम देशे सोभ लोग हुऐ बरैबाद, तिन्‍नां मांझ़ै निं एक बी रहअ।
11आपणैं छ़ुटै-मुक्‍कै दै लान्हैं छ़ाडा मुंह संघै, तिन्‍नां धाचूं हुंह।
थारी बिधबा बेटल़ी सका मेरै आसरै रही।”#1 तिम. 5:5
12“बिधाता बोला इहअ, ‘तिंयां मणछ बी ज़ुंण सज़ा जोगी नांईं आथी तै, तिन्‍नां बी लागणअ मेरै सज़ा दैणें प्रिहै का झुटणअ, तम्हैं कै सोठा कि तम्हैं सज़ा बाझ़ी च़ाल्‍लै छ़ुटी? तम्हैं निं बच़ी सकदै! तम्हां लागणअ प्रिहै का झुटणअ ई! 13मंऐं खाऐ आप्पै सोह कि बोज़रा नगरी पल़णीं एही शुन्‍नीं अर उज़र कि तेता भाल़ी लागणअ लोगा प्राच। लोग लागणै तेता लै हास्सदै अर सुहांगा अर फिटक दैणा लै लणअ तिन्‍नां तैहा ज़ैगो नाअं। तेता ओरी-पोरी सोभ देश गराअं बी हणैं सदा लै उज़र। अह गल्‍ल डाही मंऐं बिधाता बोली।’”
14मंऐं बोलअ इहअ, “एदोम, मंऐं शूणअ बिधाता का समाद, बिधाता छ़ाडै देशा-देशा सेटा लै आपणैं दूत इहअ खोज़दै कि आपणीं सैना झाल़ा संघा हआ एदोम देशा संघै जुधा लै तैर।” 15बिधाता बोला एदोमा लै इहअ, “एदोम, मंऐं निं देशा-देशे मणछा जैंदरी तेरअ किछ़ ज़ोर डाहअ। तिन्‍नां निं तेरअ कोही अदर करनअ। 16ताह लागअ तेरै आपणैं ई घमंडा करै धोखअ, ज़िहअ तूह सोठा, तिहअ निं ताखा कोह डरदअ। तूह आसा बडी-बडी टोल्हा करै च़िणैं दै गहल़ै उछ़टी धारा बस्सअ द। एही ता आसा तूह मुक्षरले कोल्हा ज़िहअ उछ़टी ज़ैगा बस्सअ द, तज़ी बी थुआल़णअ मुंह तूह धरनीं। अह गल्‍ल डाही मंऐं बिधाता बोली।”
17बिधाता बोलअ इहअ, “एदोम देशा लै एछणी एही घोर बरैबादी कि तेस्सी बाती हांढदै-फिरदै लागणअ तेता भाल़ी प्राच अर तिन्‍नां छ़ुटणअ डरै दर्छ़णअ। 18एदोम देशे दशा हणीं सदोम अर अमोरा नगरी ज़ेही, तिन्‍नां नगरी ओरी-पोरी बस्सी दी नगरी बी हुई ती पठ बरैबाद। तेथ निं तेखअ कोह मणछ भिई बस्सणअ। अह गल्‍ल डाही मंऐं बिधाता बोली।#मूल. 19:24,25 19ज़िहअ जरदण नदीए नेल़ बणां का सिह घाहे घैहणीं बाखा लै उखल़ा, तिहअ एछणअ हुंह एदोमी लोगा लै, तिंयां ठुर्हनै हेरा-हेरी आपणैं देशा दूर। तेखअ करनअ तिधी तिन्‍नां राज़ ज़ुंण मंऐं तेते मालक हणां लै छ़ांटै दै आसा। मुंह ज़िहअ होर कुंण आसा? मुंह सेटा कुंण सका खल़अ टेक्‍की? इहअ कुंण राज़अ आसा ज़ुंण मेरअ मकाबलअ करी सका? 20ऐबै शूणां मेरी तैहा गल्‍ला ज़ुंण मंऐं एदोम देशा लै आसा सोठी डाही दी अर ज़िहअ हुंह तेमान नगरी लै करनअ च़ाहा। तिन्‍नें निंणै लान्हैं-शोहरू घिशणै हेल़्ही मांझ़ा का भेडा ज़िहै! तिन्‍नें घअर हणैं रित्तै। 21ज़ांऊं एदोम देश ढुल़णअ, तेते छ़ेल़ा करै हणीं सारी पृथूई दी ज़ाज़री, तेथ लागणीं एही लैल़ा-पकारा कि तिंयां शुण्हनी दूर लाल समुंदरे देशै बी। 22दुशमणा एछणअ उझै का मुक्षरलै ज़िहै उटअ डैअ बाही उंधै संघा फुआरनै बोज़रा नगरी प्रैंदै फैंख। तेभै छ़ुटणअ एदोम देशे सैना दर्छ़णअ तिन्‍नां उझ़णै भितरी सूंणें दाह लागी दी बेटल़ी ज़िहै शूल़।”
दमिश्क नगरीए बारै बिधातो समाद
23 # ईशा. 17:1-3; आम. 1:3-5; जक. 9:1 दमिश्क नगरीए बारै बोलअ बिधाता इहअ, “हमात अर अर्पात नगरी लै पल़ी आफ़त तिन्‍नां पल़अ फिकर किल्हैकि तिन्‍नां सेटा पुजी बूरी शणांईं। तिन्‍नों चुटअ हैअ ई। तिंयां आसा भितरा का समुंदरा ज़िहै बुआल़ लागै दै। 24दमिश्क नगरीए लोगो ज़ोर हुअ खतम अर तिंयां ठुर्है डरै दूर। तिन्‍नां आसा काम्मणीं लागी दी तिन्‍नां आसा सूंणें दाह लागी दी बेटल़ी ज़िहै शूल़ उझ़ुऐ दै। 25मशूर नगरी दमिश्क ज़ेता लै हुंह खुश रहा थिअ, सह हुई पठ उज़र अर शुन्‍नीं। 26तैहा धैल़ी पाणै ऐहा नगरीए ज़ुआन मणछ बाता अर च़फै मारी अर सारै जोधै बी करनै मारी हक्‍क। 27मुंह दैणी दमिश्क नगरीए फेर गहल़े दुआली दी आग चैल़णै, तेता करै हणैं राज़ै बेन्हदादे मैहलै दझ़ी खतम। अह गल्‍ल डाही मंऐं बिधाता बोली ज़ुंण स्वर्गे सारी सैनो मालक आसा।”#1 राज़. 15:18,20; 2 राज़. 13:24
कदार टोली अर हसोर नगरीए बारै बिधातो समाद
28बिधाता दैनअ कदार टोली अर हसोर नगरीए कबज़ै आल़ै मुल्खे बारै समाद ज़ेथ बाबेल देशे राज़ै नबूकदनेसरै कबज़अ किअ त। बिधाता बोलअ इहअ, “कदारे लोगा लै पल़ चुटी अर पुर्बा बाखा बस्सी दी टोली कर बरैबाद। 29तिन्‍नें भेडा-बाकरीए हेल़्ही, तिन्‍नें खिम्भ, तेते पल्दै अर ज़ुंण बी तेथ आसा, तिन्‍नां दी कर तूह कबज़अ। तिन्‍नें ऊँट बी आण छ़ेल़्ही संघा बोलै तिन्‍नां मणछा लै हाक्‍का लाई, ‘डअर आसा तम्हां फेर-फिरदी।’
30“हसोर नगरी लोगो, हुंह बिधाता बोला तम्हां लै इहअ कि ठुर्हा, संघा रहा लुक्‍की। बाबेल देशो राज़अ नबूकदनेसर तम्हां मारने सोठ डाही दी, सह बोला थारै बारै इहअ, 31‘च़ाल्‍ला, हाम्हां पल़णअ तिन्‍नां मणछा मारदै चुटी ज़हा डअर-भगैर ई निं आथी! तिन्‍नें नगरी नां प्रऊल़ी आथी अर नां आगल़ी दी आथी। तिंयां रहा खुल्है दी निहंचै।’
32“तिन्‍नें ऊँट अर डागै चैणें हेल़्ही लुट पठी! तिंयां लोग दाल़्ही-मुछ़ा छाम्बणै आल़ै मणछ छिंगणैं मुंह सातै-बातै, तिन्‍नां लै पाणीं मुंह फेरा-फेर आफ़त। 33हसोर नगरी हणीं सदा लै उज़र अर शुन्‍नीं। तैहा ज़ैगा बस्सणै शैल़ी-शैल़ठै अर हुहल़ू। तेथ निं कोह मणछ भिई बस्सणअ। अह गल्‍ल डाही मंऐं बिधाता बोली।”
एलाम नगरीए बारै बिधातो समाद
34ज़िहअ ई सिदकिया यहूदा मुल्खो राज़अ बणअ, बिधाता दैनअ आपणैं गूर मुंह जेरमयाह का एलाम देशे बारै समाद। 35स्वर्गे सारी सैने मालक बिधाता बोलअ इहअ, “एलाम नगरीओ बल आसा तिन्‍नें कतीर-कबाणा आल़ै। पर तिंयां करनै मुंह खतम। 36एलाम नगरी लै छ़ाडणीं मुंह सरगा का फेरा-फेर बागरी अर तिन्‍नें लोग छिंगणैं मुंह सारै दी, इहअ निं कुंण देश हणअ ज़ेथ एलाम नगरीए लोग निं पुजणैं। 37मुंह पाणीं एलाम नगरीए लोगा भितरी तिन्‍नें दुशमणे डअर ज़ुंण तिन्‍नां मारनअ च़ाहा। मेरै रोश्शा करै हणैं एलाम नगरीए लोग बरैबाद, तिन्‍नां संघै जुधा लै छ़ाडणीं सैना, तिन्‍नां रहणअ तिन्‍नां तेभै तैणीं मारदै लागी ज़ेभै तैणीं तिंयां तिधा का पठी खतम नां होए। 38तिन्‍नें राज़ै अर तिन्‍नें कार-करिंदै करनै मुंह तिधा का खतम संघा बशैल़णीं मुंह एलाम आपणीं राज़गाद्दी। 39पर बादा का करनै मुंह एलाम नगरीए लोग भिई भरपूर ज़िहै तिंयां पैहलै थिऐ। अह गल्‍ल डाही मंऐं बिधाता बोली।”

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