रोमियों 6

6
पाप और मृत्‍यु पर विजय
1क्‍या इसका अर्थ यह है कि हमें पाप करते रहना चाहिए, ताकि अनुग्रह की वृद्धि हो?#रोम 3:5-8 2कदापि नहीं! हम, जो पाप की ओर से मर चुके हैं, अब कैसे पाप में जीते रहेंगे?#गल 2:19; 1 पत 2:24 3क्‍या आप लोग यह नहीं जानते कि येशु मसीह का जो बपतिस्‍मा हम सब को मिला है, वह उनकी मृत्‍यु का बपतिस्‍मा है?#गल 3:27 4हम उनकी मृत्‍यु का बपतिस्‍मा ग्रहण कर उनके साथ इसलिए दफनाये गये हैं कि जिस तरह मसीह पिता के महिमामय सामर्थ्य से मृतकों में से जी उठे हैं, उसी तरह हम भी एक नया जीवन जीयें।#1 पत 2:21; कुल 2:12
5यदि हम इस प्रकार मसीह के समान मर कर उनके साथ एक हो गये हैं, तो हम उन्‍हीं के समान पुनरुत्‍थान में भी उनके साथ एक होंगे।#फिल 3:10-11 6हमें कभी नहीं भूलना चाहिए कि हमारा पुराना स्‍वभाव मसीह के साथ क्रूस पर चढ़ाया जा चुका है, जिससे पाप का शरीर मर जाये और हम फिर पाप के दास न बनें;#गल 5:24 7क्‍योंकि जो मर चुका है, वह पाप की गुलामी से मुक्‍त हो गया है।#1 पत 4:1
8हमें विश्‍वास है कि यदि हम मसीह के साथ मर गये हैं, तो हम उन्‍हीं के जीवन के भी भागी होंगे; 9क्‍योंकि हम जानते हैं कि मसीह मृतकों में से जी उठने के बाद फिर कभी नहीं मरेंगे। अब मृत्‍यु का उन पर कोई वश नहीं। 10जब वह मरे, तो पाप की ओर से एक बार ही मर गये; परन्‍तु अब वह जीवित होकर परमेश्‍वर के लिए ही जीते हैं।#इब्र 9:26-28; 1 पत 3:18 11आप लोग भी अपने को ऐसा ही समझें—-पाप के लिए मरा हुआ और येशु मसीह में परमेश्‍वर के लिए जीवित।#2 कुर 5:15; 1 पत 2:24
12अब आप लोग अपने मरणशील शरीर में पाप का राज्‍य स्‍वीकार नहीं करें और उसकी वासनाओं के अधीन नहीं रहें।#उत 4:7 13आप अपने अंगों को अधर्म के साधन बनने के लिए पाप को अर्पित नहीं करें। आप अपने को मृतकों में से पुनर्जीवित समझकर परमेश्‍वर के प्रति अर्पित करें और अपने अंगों को धार्मिकता के साधन बनने के लिए परमेश्‍वर को सौंप दें।#रोम 12:1; इफ 2:5; 5:14 14आप लोगों पर पाप का कोई अधिकार नहीं रहेगा। अब आप व्‍यवस्‍था के नहीं, बल्‍कि अनुग्रह के अधीन हैं।#1 यो 3:6
धार्मिकता के अधीन
15तो, क्‍या हम इसलिए पाप करें कि हम व्‍यवस्‍था के नहीं, बल्‍कि अनुग्रह के अधीन हैं? कदापि नहीं!#रोम 5:17,21 16क्‍या आप यह नहीं समझते कि आप अपने को आज्ञाकारी दास के रूप में जिसके प्रति अर्पित करते हैं और जिसकी आज्ञा का पालन करते हैं, आप उसी के दास बन जाते हैं? यह दासता चाहे पाप की हो, जिसका परिणाम मृत्‍यु है; चाहे परमेश्‍वर की हो, जिसके आज्ञापालन का परिणाम धार्मिकता है।#यो 8:34; 2 पत 2:19 17परमेश्‍वर को धन्‍यवाद कि आप लोग, जो पहले पाप के दास थे, अब सम्‍पूर्ण हृदय से उस मानक शिक्षा के मार्ग पर चलने लगे, जो अनुगमन के लिए आपको दी गयी है। 18आप पाप से मुक्‍त हो कर धार्मिकता के दास बन गये हैं।#यो 8:32 19मैं आपकी मानवीय दुर्बलता के कारण साधारण मानव जीवन का उदाहरण दे रहा हूँ। आप लोगों ने जिस तरह पहले अपने शरीर को अशुद्धता और अधर्म के अधीन किया था, जिससे वह दूषित हो गया था, उसी तरह अब आप अपने शरीर को धार्मिकता के अधीन कर दीजिए, जिससे वह पवित्र हो जाये।
20क्‍योंकि जब आप पाप के दास थे, तो धार्मिकता के नियन्‍त्रण से मुक्‍त थे। 21उस समय आप को उन कर्मों से क्‍या लाभ हुआ? अब उनके कारण आप को लज्‍जा होती है; क्‍योंकि उनका परिणाम मृत्‍यु है।#रोम 8:6,13; यहेज 16:61,63 22किन्‍तु अब पाप से मुक्‍त हो कर आप परमेश्‍वर के दास बन गये और पवित्रता का फल उत्‍पन्न कर रहे हैं, जिसका परिणाम है शाश्‍वत जीवन;#2 पत 1:9 23क्‍योंकि पाप का वेतन मृत्‍यु है, किन्‍तु परमेश्‍वर का वरदान है हमारे प्रभु येशु मसीह में शाश्‍वत जीवन।#रोम 5:12

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