परमेश्वर हमारे साथ – आगामी बाइबल योजनाНамуна

मरकुस रचित सुसमाचार
परमेश्वर हमें प्रेम करने के लिए हमारे साथ है।
अंग्रेजी भाषा में बहुतायत से इस्तेमाल होने वाला शब्द प्रेम है। यदि आप को यकीन नहीं होता है तो- आप गूगल पर Love टाइप करके देख लीजिए आपके सामने बहुत से परिणाम आ जाएगें। ऐसा कहा जाता है कि स्मार्टफोन में आपके आदेश को सुनकर पालन करने वाले सहायक से हाल में सामान्यतः यह प्रश्न पूछा गया था “क्या तुम मुझसे प्रेम करते हो?” इसमें कोई सन्देह नहीं है कि यह सहायता करने की पुकार है।
जब यीशु इस धरती पर आये तो उसकी प्रगट इच्छा थी कि वह मानवजाति के प्रति अपने प्रेम को प्रगट कर सके। उसने हमेशा अपने लोगों को प्रेम किया लेकिन उसके लोगों का ध्यान उस पर नहीं गया। जिसके परिणाम स्वरूप वे अपने प्रेम करने वाले परमेश्वर को भूल कर उससे फिर गये जिसके कारण परमेश्वर का क्रोध और दण्ड उन पर पड़ा। लेकिन परमेश्वर ने अपने अद्भुत प्रेम के कारण उन्हें हमेशा के लिए नहीं त्याग दिया और न ही उनके प्रति उदासीन होकर उन्हें छोड़ दिया वरन उसने उन्हें क्षमा किया और उन्हें अपने पास बुलाया। कितना अद्भुत प्रेम?
अथाह, अवर्णीय, अति उदार व अतुल्य। यही वह प्रेम था, जिसके कारण उसने अपने पुत्र को हम में से एक बनने के लिए धरती पर भेज दिया ताकि हम बिल्कुल नये तरीके से परमेश्वर का अनुभव कर सकें। हमारे लिए इसका क्या मायना है? हम में से हर एक जन प्रेम की चाह करता है और कोई इस से अछूता नहीं है। सुसमाचार में सबसे अच्छी खबर यह है कि परमेश्वर हम से इस तरह प्रेम करते हैं मानो कि पूरी दुनिया में हम केवल अकेले जन हों। आप जैसे भी हैं वह आपसे प्रेम करता है- अर्थात गंदे, ऊलजलूल इतिहास वाले इत्यादि होने के बावजूद। जब आप उसके साथ होते हैं तो आपको किसी प्रकार के पवित्रीकरण या सुधार की आवश्यकता नहीं होती। वह आपसे इतना प्रेम करता है कि उसने आपके लिए अपना इकलौता पुत्र भेज दिया ताकि आप कभी अकेले या त्यागे हुए न ठहरें। वह अपने सम्पूर्ण जीव से आपको प्रेम करता है और आपके प्रति उसका प्रेम इस बात पर बिल्कुल निर्भर नहीं करता कि आप क्या करते हैं या आपका व्यवहार कैसा है। क्या यह बात सुकून देने वाली नहीं है? जिस भ्रष्ट संसार में हम रहते हैं उसने प्रेम को बहुत सी चीज़ों में बदल दिया है जिससे कारण हम कई बार परमेश्वर के प्रेम को स्वीकार नहीं कर पाते हैं। हम उसके प्रेम को ग्रहण करते समय संषय या सन्देह करते हैं। जबकि सरल सी बात यह है कि- मसीह हम से इतना प्रेम करता है कि जब हम पापी ही थे तो वह हमारे लिए मरा और मसला केवल यहीं पर खत्म नहीं हो जाता। वह हमें अपने परिवार में अपनाता है और अब हम परमेश्वर की सन्तान कहलाते हैं। यह कितने सौभाग्य की बात है। अब हम पर अकेले, अनचाहा, नालायक, अयोग्य, उलझा हुआ का बिल्ला नहीं लगा हुआ है। अब आपको “परमेश्वर की सन्तान” कहा जाता है।
कुछ क्षण लेकर इस विचार को अपने मन की गहराई से बस जाने दें।
आप तब तक इस उपनाम को अपने से जोड़कर बोलें जब तक कि यह आपके मने गहराई में बस न जाए।
अतः चाहे हम सामाजिक दूरी बनाये रखने और अकेले रहने वाले दौर में जी रहे हैं, हमें अप्रिय या अकेला या त्यागा हुआ महसूस करने की कोई ज़रूरत नहीं है। परमेश्वर हम से प्रेम करता, हमें जानता और हमें दुलार करता है, यीशु का धन्यवाद हो जो हमारे बीच में रहता है। मसीह के जीवन, उसकी मृत्यु और उसके पुनरूत्थान ने परमेश्वर और हमारे बीच की खाई को हमेशा हमेशा के लिए भर दिया है जिसकी वजह से हम अब उससे दूर नहीं हैं और जिसके कारण हम उसके प्रेम पर भी कोई सन्देह नहीं करते।
प्रार्थनाः
प्रिय प्रभु,
मुझे अद्भुत रीति से प्रेम करने के लिए आपका धन्यवाद। मैं इसकी गहराई या ऊंचाई नहीं समझ सकता, लेकिन मैं जानता हूं कि यह वास्तविक और शक्तिशाली है। मैं अपने आप को आपके प्रेम के हाथों में सौंपता हूं जिससे कि सारा भय और असुरक्षा दूर हो जाए और मुझे शान्ति और सुरक्षा के साथ जीवन व्यतीत करने में सहायता मिल सके। मैं आपकी सन्तान हूं और मैं आपको अपने पिता के रूप में स्वीकार करता हूं।
यीशु के नाम में मांगता हूं।
आमीन।
About this Plan

हमारा संसार ज़्यादातर समयों में अनिश्चित व उथल पुथल जान पड़ता है। यदि परमेश्वर के पुत्र, यीशु न होते तो, हमारे पास कोई आशा नहीं होती। हर एक क्रिसमस हमें इम्मानुएल रूपी उपहार की याद दिलाता है- परमेश्वर का हमारे साथ होना एक उपहार है जो हमेशा बना रहता है। हम अब से लेकर सर्वदा तक कभी भी अकेले नहीं हैं। यह हमारे लिए एक ख़ुशी की बात है।
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