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यूहन्ना 19:30
किताब-ए मुक़द्दस
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यह सिरका पीने के बाद ईसा बोल उठा, “काम मुकम्मल हो गया है।” और सर झुकाकर उसने अपनी जान अल्लाह के सुपुर्द कर दी।
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यूहन्ना 19:28
इसके बाद जब ईसा ने जान लिया कि मेरा मिशन तकमील तक पहुँच चुका है तो उसने कहा, “मुझे प्यास लगी है।” (इससे भी कलामे-मुक़द्दस की एक पेशगोई पूरी हुई।)
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यूहन्ना 19:26-27
जब ईसा ने अपनी माँ को उस शागिर्द के साथ खड़े देखा जो उसे प्यारा था तो उसने कहा, “ऐ ख़ातून, देखें आपका बेटा यह है।” और उस शागिर्द से उसने कहा, “देख, तेरी माँ यह है।” उस वक़्त से उस शागिर्द ने ईसा की माँ को अपने घर रखा।
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यूहन्ना 19:33-34
जब वह ईसा के पास आए तो उन्होंने देखा कि वह फ़ौत हो चुका है, इसलिए उन्होंने उस की टाँगें न तोड़ीं। इसके बजाए एक ने नेज़े से ईसा का पहलू छेद दिया। ज़ख़म से फ़ौरन ख़ून और पानी बह निकला।
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यूहन्ना 19:36-37
यह यों हुआ ताकि कलामे-मुक़द्दस की यह पेशगोई पूरी हो जाए, “उस की एक हड्डी भी तोड़ी नहीं जाएगी।” कलामे-मुक़द्दस में यह भी लिखा है, “वह उस पर नज़र डालेंगे जिसे उन्होंने छेदा है।”
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यूहन्ना 19:17
वह अपनी सलीब उठाए शहर से निकला और उस जगह पहुँचा जिसका नाम खोपड़ी (अरामी ज़बान में गुलगुता) था।
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यूहन्ना 19:2
फ़ौजियों ने काँटेदार टहनियों का एक ताज बनाकर उसके सर पर रख दिया। उन्होंने उसे अरग़वानी रंग का लिबास भी पहनाया।
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