शधाणूं 23

23
1पल़सी भाल़अ माहा सभा बाखा राम्बल़ै करै संघा बोलअ, “भाईओ, मंऐं काटी आझ़ तैणीं परमेशरा सम्हनै शुचै रही ज़िन्दगी!”
2हनन्याह माहा प्रोहतै बोलअ पल़सी नेल़ खल़्हुऐ दै लोगा लै, “एऊए मुंहैं बाहा च़ैंडै।” 3एता भाल़ी बोलअ पल़सी हनन्याह लै, “परमेशरा दैणीं ताल्है ऐहा गल्‍ला पिछ़ू आप्पै सज़ा, तूह आसा नसाफ आसना दी मेरै फैंसलै करदअ तेऊ बधाना करै लागअ द ज़ुंण परमेशरै आपणैं गूर मोसा लै दैनअ। पर आप्पू निं तूह तेऊ बधाना मंदअ! किल्हैकि, ज़ै मेरी किज़ै गलती ई निं निखल़ी, तै किल्है बोलअ तंऐं, ‘एऊए मुंहैं बाहा च़ैंडै?’”#लेब. 19:15; एज. 13:10-15
4ज़ुंण तिधी नेल़ खल़्हुऐ दै तै तिन्‍नैं बोलअ पल़सी लै रोश्शा संघै, “तूह परमेशरे माहा प्रोहता लै बूरअ बोला?”
5पल़सी बोलअ, “भाईओ, मुखा निं थोघै त कि अह आसा माहा प्रोहत, किल्हैकि शास्त्रा दी आसा लिखअ द कि आपणैं लोगे सैणैं लै निं बूरअ बोली।”#लुआ. 22:28
6तेखअ ज़ांऊं पल़सी का थोघ लागअ कि सभा दी केतरै फरीसी अर केतरै सदुकी मणछ आसा, तेऊ बोलअ ज़ोरै-ज़ोरै, “भाईओ, हुंह आसा फरीसी अर फरीसी मणछे खिंबा का, मूंऐं दै अर मूंऐं दै मणछे आशा दी अर मरी करै ज़िऊंदै हणें बारै आसा लागअ द मेरअ नसाफ आसना सम्हनै मकदमअ हंदअ।”
7ज़ांऊं पल़सी अह गल्‍ल बोली, फरीसी अर सदुकी पंथे लोगा मांझ़ै पल़अ झ़गल़अ अर सभा दी पल़ी फूट। 8किल्हैकि सदुकी पंथे लोग मना तै इहअ बी कि मरी करै निं कोहै सकदअ भिई ज़िऊंदअ हई अर नां स्वर्ग दूत अर नां भूत आथी, पर फरीसी मना तै इना सोभी गल्‍ला।
9तेखअ मच़अ बडअ हाल्‍लअ-गोल्‍लअ अर कई शास्त्री तै फरीसी मणछा पक्षा दी, तिंयां उझ़ुऐ खल़ै इहअ बोली किअ तिन्‍नैं झ़गल़अ, “हाम्हां का निं एऊ मणछा दी किछ़ै बूरी गल्‍ल शुझदी, ज़ै कुंणी भूत अर स्वर्ग दूता संघै गल्‍ला किई तै किज़ै हुअ?”
10ज़ांऊं खास्सअ झ़गल़अ हुअ, सपाही दले सरदारै ऐहा डरै कि इहअ निं हआ कि ईंयां पल़सी काटे मारे, तेऊ दैनअ इहअ हुकम कि पल़सी काढा इना मांझ़ा का ज़ोरा-ज़ोरी बागै अर एऊ निंयां गहल़ा लै।
11तैहा ई राची बोलअ प्रभू ईशू पल़सी का दर्शण दैई करै, “पल़सी, तूह निं फिकर करी, किल्हैकि ज़ेही शाजत तंऐं मेरी एरुशलेम नगरी दैनी, तेही शाजत लागणीं ताह रोम डेऊई बी दैणीं।”
पल़सीए हत्या करने च़ाल
12दुजै धैल़ै किअ कई यहूदी एक्‍कअ अर तिन्‍नैं खाऐ इहै सोह कि ज़ेभै तैणीं तिंयां पल़सी मारी खतम निं करी हेरे, ज़ै तेता का आजी तिंयां किज़ै खाए-पिए, तै आसा तिन्‍नां लै लानत। 13ज़ुंणीं इहै सोह खाऐ तै, तिंयां थिऐ कोई च़ाल़्ही ज़ण्हैं का खास्सै।
14तिन्‍नैं बोलअ बडै प्रोहता अर सैणैं सेटा डेऊई, “हाम्हैं आसा एही ठान्हीं दी कि ज़ांऊं तैणीं हाम्हैं पल़सी मारी निं पाए, तेभै तैणीं हाम्हैं किज़ै च़ाखे बी, हाम्हां लै आसा लानता प्रैंदै लानत। 15तैही समझ़ाऊआ ऐबै माहा सभा संघी सपाही दले सरदारा इहअ कि तेऊ छ़ाडा तम्हां सेटा लै कि तम्हां शाची सज़ा दैणैं का आजी तेऊए बारै ठीक-ठीक पुछ़-ज़ाच़ करनी, अर हाम्हैं हणैं तेऊ इधी तम्हां सेटा पुजणैं का आजी ई मारना लै ताखुई रहै दै।”
16तिधी त पल़सीओ भाणज़ू तेऊ शूणीं ईंयां सारी गल्‍ला कि ईंयां आसा पल़सी मारने ताका रहै दै। तेऊ दैनअ गहल़ै डेऊई पल़सी लै अह समाद। 17पल़सी बोलअ सुबैदारा मांझ़ै एक आप्पू सेटा लै शादी करै, “एऊ खारकै मणछा निंयां सपाही दले सरदारा सेटा लै, अह च़ाहा किज़ै खोज़णअ।”
18तेऊ बी निंयं सह सपाही दले सरदारा सेटा लै अर सरदारा का बोलअ, “पल़सी कैदी किई मुंह शादी करै एही अरज़ कि अह ज़ुआन मणछ च़ाहा सपाही दले सरदारा का किज़ै खोज़णअ, एऊ निंऊं तेऊ सेटा लै।”
19सपाही दले सरदारै पुछ़अ तेऊओ हाथ ढाकी करै सह ज़ुदअ ज़िहअ निंईं करै, “तूह किज़ै च़ाहा मुखा खोज़णअ?”
20तेखअ खोज़ी तेऊ सारी गल्‍ला, “यहूदी आसा एक्‍कअ किअ द तिंयां च़ाहा कि ताखा बोल़णअ तिन्‍नां इहअ कि काल्‍ला आण पल़सी माहा सभा लै, ज़ाणनअ कि तूह च़ाहा तेऊए ठीक-ठीक पुछ़-ज़ाच़ करनी। 21पर तिन्‍नें गल्‍ला निं मनी, किल्हैकि तिन्‍नां मांझ़ै आसा च़ाल़्ही का बी खास्सै मणछ पल़सी बातो-बात मारने ताका रहै दै। तिन्‍नैं आसा एही डाही दी कि ज़ेभै तैणीं पल़सी मारी निं पाए, तेभै तैणीं खाए-पिए, तिन्‍नां लै आसा लानत, अर तिंयां आसा एभै तैर अर तेरै बोला न्हैल़ै लागै दै।”
22तेखअ छ़ाडअ सपाही दले सरदारै सह ज़ुआन मणछ इहअ बोली, “ऐहा गल्‍ला निं कोही का खोज़ी ज़ुंण तंऐं मुखा खोज़ी।”
पल़सी फेलिक्स सेटा लै छ़ाडणअ
23सपाही दले सरदारै शादै दूई सुबैदार संघा बोलअ तिन्‍नां लै इहअ, “दूई शौ सपाही, सत्तर शुंआरी अर दूई शौ सपाही डाहा राची भितरी कैसरिया नगरी लै डेऊणा लै तैर करी। 24संघा डाहा पल़सीए शुंआरी लै घोल़ै तैर करी कि सह पजैल़णअ फेलिक्स राज़पाला सेटा राज्ज़ी राम्बल़अ बच़ाऊई।” 25सरदारै लिखी राज़पाला लै एही एक च़िठी बी,
26“माहा प्रतप्पी फेलिक्स सैणैं लै क्लौदिउस लासिआसा बाखा राज्ज़ी-खुशी।
27“अह मणछ लाअ त यहूदी ढाकी करै मारी, पर ज़ांऊं मुखा इहअ थोघ लागअ कि अह आसा रोमी, सपाहीओ दल निंईं करै आणअ मंऐं तिन्‍नां का बच़ाऊई। 28मंऐं किई इहअ थोघ करने खास्सी कोशिश कि तिंयां एऊ लै किज़ै दोश लाआ, तै निंयं मंऐं तिन्‍नें माहा सभा लै। 29तिधी लागअ मुखा थोघ कि तिंयां लाआ तिन्‍नें बधाना मनणे बारै एऊ लै दोश, पर मारनै अर कैद करी बान्हीं डाहणैं जोगी दोश निं मुखा एऊ दी किछ़ै शुझदअ।
30“ज़ांऊं मुखा कुंणी इहअ खोज़अ कि तिन्‍नैं आसा अह लाअ द मारी, मंऐं छ़ाडअ तेभी अह ताह सेटा लै, अर मंऐं आसा एऊ लै मकदमैं करनै आल़ै लै बी बोलअ द कि ताह सेटा डेऊई खोज़ै सारी गल्‍ला, ज़ुंण बी तिन्‍नां बोल़णअ होए।”
31तेखअ ज़िहअ हुकम सपाही लै दैनअ त, तिहअ ई निंयं तिन्‍नैं पल़सी अर तिंयां पुजै राची भितरी अंतिपत्रोस नगरी लै। 32दुजै धैल़ै पुजै ज़ांघा हांढी डेऊणैं आल़ै सपाही एरुशलेम नगरी गहल़ै बापस अर घोल़े शुंआरी आल़ै डेऊऐ पल़सी संघै। 33ज़ांऊं तिंयां कैसरिया नगरी पुजै, तिन्‍नैं दैनी सह च़िठी राज़पाला का अर पल़सी बी निंयं तेऊ सेटा लै। 34तेऊ पुछ़अ च़िठी पहल़ी करै पल़सी का, “तूह केऊ मुल्खा का आसा?” पल़सी खोज़अ, “हुंह आसा किलकिआ का।”
35ज़ांऊं तेऊ का इहअ थोघ गअ लागी कि अह आसा किलकिआ मुल्खा का, तेऊ बोलअ पल़सी लै, “ज़ेभै ताल्है मकदमैं आल़ै बी एछे तेभै करूं हुंह तम्हां सोभिए गल्‍ला शूणीं थारअ फैंसलअ।” तेखअ दैनअ तेऊ इहअ हुकम कि पल़सी डाहअ हेरोदेस राज़ेए राज़ भबनै कैद करी, संघा डाहअ तिधी पहरअ पाई।

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