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मत्तियाह 4:4
Muktidata Yeshu Granth
MYG
प्रभु येशु ने उत्तर दिया, “परमात्मा-ग्रंथ में यह लिखा है, ‘इंसान का जीवन केवल रोटी खाने से ही नहीं, परंतु परमात्मा के मुख से निकली हर एक बात पर भी निर्भर है।’”
तुलना
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मत्तियाह 4:10
प्रभु येशु ने उससे कहा, “मुझ से दूर हट शैतान, क्योंकि परमात्मा-ग्रंथ में यह लिखा है, ‘तुम केवल प्रभु परमात्मा की ही भक्ति और सेवा करो।’”
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मत्तियाह 4:7
प्रभु येशु ने उससे कहा, “किंतु परमात्मा-ग्रंथ में यह भी लिखा है, ‘तुम प्रभु परमात्मा को मत परखो।’”
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मत्तियाह 4:1-2
तब पवित्र आत्मा प्रभु येशु को सुनसान बंजर जगह में ले गया कि शैतान उन्हें परखे। जब प्रभु येशु चालीस दिन और चालीस रात उपवास कर चुके तब उन्हें भूख लगी।
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मत्तियाह 4:19-20
गुरु येशु ने उनसे कहा, “आओ, मेरे शिष्य बनो। तुम्हारा काम मछली पकड़ना रहा है। लेकिन अब मैं तुम्हें लोगों को परमात्मा की शरण में लाना सिखाऊँगा।” वे तुरंत जालों को छोड़कर उनके साथ चल पड़े।
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मत्तियाह 4:17
उस समय से गुरु येशु लोगों को परमात्मा के शुभ संदेश सुनाने लगे। उन्होंने कहा, “अपने बुरे कर्मों से पश्चाताप करो, क्योंकि जो परमस्वर्ग में रहते है उनका शासन शुरू होने वाला है।”
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