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मती 25:40
Wagri
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“मुँ राजो उतर मा वणहू केई, ‘मुँ तमय हासु कऊँ हूँ तमय अणअ नाना विसवासी पाई बेन मा हू कणाक एक ने हारू जी कई किदू तु, वु तमय मय हारू किदू।’
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मती 25:21
“विने मालिके वणाहू केजू, ‘साबास, तु विसवास लायक हाऊ दास हे, थुड़ीक रकम मा तु विसवास लायक रेजो, मुँ तय फेर वदार ने हकदार बणावी। माय जा नी आपड़े मालिक ने हाते राजी था।’”
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मती 25:29
केमके जणा कनी हे, वणाय फेर आलजू जाहीं नी वणा कनी वदार थाई जाहीं। पण जणा कनी नीं हे वणा कनी हू जी वणा पाहे हे वु बी लई लिदू जाहीं।
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मती 25:13
“तणी जागता रो, केमके तमो नीते वणे दाड़े जाणो हो नी नीते वणी टिमे, जेरे मुँ मनक ने सुरो आवी जाई।”
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मती 25:35
केमके मुँ पुकजो तो तमय मय खावा ने हारू आलजू नी मुँ तरजो तो, ते तमय पाणी पाजू नी मुँ परदेसी तो, ते तमय तमारे घेर मा राकजो।
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मती 25:23
विने मालिके वणाहू केजू, ‘दन्य हे हाऊ नी विसवास लायक दास तु थुड़ाक मा विसवास लायक रेजो मुँ तय कईक सीजो ने हकदार बणावी। माय जा नी आपड़े मालिक ने हाते राजी था।’ ”
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मती 25:36
मुँ नागो ते तमय मय लबरअ पेरावजअ मुँ बिमार तो ते तमय मारे पतो लिदो, नी मुँ जेळ मा तो, ते तमो मय मलवा आजा।’ ”
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