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नीतिवचन 17:17
हरियाणवी भाषा म्ह पवित्र शास्त्र
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दोस्त हरेक बखत म्ह प्यार करै सै, अर बिप्दा के दिन भाई बण जावै सै।
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नीतिवचन 17:22
मन की खुशी आच्छी दवाई सै, अर मन कै टूटण तै सारी हाड्डी सूख जावै सै।
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नीतिवचन 17:9
जो दुसरे के अपराध नै ढक देवै सै, वो प्यार का टोह्ण आळा सै, पर जो बात की चर्चा बार-बार करै सै, वो गहरे दोस्तां म्ह भी फूट गेर देवै सै।
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नीतिवचन 17:27
जो सम्भळ कै बोल्लै सै, वो ज्ञान्नी ठहरै सै; अर जिसकी आत्मा शान्त रहवै सै, वोए समझ आळा माणस ठहरै सै।
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नीतिवचन 17:28
मूर्ख भी जिब चुप रहवै सै, तो बुद्धिमान गिण्या जावै सै; अर जो अपणा मुँह बन्द राक्खै वो समझ आळा गिण्या जावै सै।
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नीतिवचन 17:1
चैन कै गैल सूक्खा टुकड़ा, उस घर की जगहां तै बढ़िया सै, जो मेलबलि-पशुआं तै भरया हो, अर उस म्ह झगड़े-रगड़े हो।
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नीतिवचन 17:14
झगड़े की शरुआत बाँध के छेद कै जिसी सै, झगड़ा बढ़ण तै पैहले उसनै छोड़ देणा भला सै।
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नीतिवचन 17:15
जो दोषी नै बेकसूर अर जो बेकसूर नै दोषी ठहरावै सै, उन दोनुआ तै परमेसवर नफरत करै सै।
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