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यशायाह 51:12
हरियाणवी भाषा म्ह पवित्र शास्त्र
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“मै, मै ए तेरा शान्तिदाता सूं; तू कौण सै जो मरण आळे माणस तै, अर घास की तरियां मुरझाण आळे माणस तै डरै सै
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यशायाह 51:16
मन्नै तेरे मुँह म्ह अपणे वचन डाले, अर तेरे ताहीं अपणे हाथ की आड़ म्ह छिपाए राख्या सै; ताके मै अकास ताहीं ताणुं अर धरती की नींव डालूँ, अर सिय्योन तै कहूँ, ‘थम मेरी प्रजा सों।’”
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यशायाह 51:7
“हे धार्मिकता के जाणण आळेयो, जिनके मन म्ह मेरे नियम-कायदे सै, थम कान लगाकै मेरी सुणो; माणसां की बदनाम्मी तै ना डरो, अर उनके निन्दा करण तै हैरान ना हो।
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यशायाह 51:3
यहोवा नै सिय्योन ताहीं शान्ति दी सै, उसनै उसके सारे खण्डहरां ताहीं शान्ति दी सै; वो उसके जंगळ नै अदन के बाग की तरियां अर उसके निर्जल देश नै यहोवा की वाटिका की तरियां बणावैगा; उस म्ह खुशी अर आनन्द अर धन्यवाद अर भजन गाण का शब्द सुणाई पड़ैगा।”
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यशायाह 51:11
सो यहोवा के छुड़ाए होए माणस बोहड़कै जयजयकार करदे होए सिय्योन म्ह आवैंगे, अर उनके सिर पै सदा का आनन्द गूँजदा रहवैगा; वे खुशी अर आनन्द पाया करैंगे, अर शोक अर सिसकियाँ का अन्त हो जावैगा।
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